चलो आज मैं भी तो इक़रार कर लूँ
इकतरफा सही तुमसे प्यार कर लूँ
दबा रखना ये ख्वाहिश अच्छा नहीं
बैचेन दिल को और बेक़रार कर लूँ
दिल आदी हो चुका है बेवफाई का
कैसे आज दिल का ऐतबार कर लूँ
वो तेरी यादें और याद के किस्से
आखिरी वक्त को यूँ यादगार कर लूँ
अब तो झूठों को बड़ी क़दर साहब
खुद को मैं भी ऐसा फनकार कर लूँ
जो तुमको हो क़बूल तो इक़रार करो
कोई शक़ रहे तो मैं ही इनकार कर लूँ
क्या भरोसा आज कल मुहब्बत का
फालतू में ख़त मैं कोई तैयार कर लूँ
भीग लूँगा अब तो मैं भी बारिश में
वक़्त है तो सावन का इंतज़ार कर लूँ
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