अपनी शराफ़त को इस तरह दिखाते हैं लोग
महफ़िल में आईने से खुद को बचाते हैं लोग
मुसीबत में देख दूसरों को मुस्कुराते हैं लोग
इस ज़माने में अपने नए रंग दिखाते हैं लोग
कहने को तो हमेशा हमारे ही ये हुआ करते हैं
वक़्त आने पर हम को यूँ ही दफनाते हैं लोग
मशविरा देते हैं ज़िन्दगी जीने का वो हमको
और खुद रूठ कर हमसे चले जाते हैं लोग
अश्क़ किसी के लोगों से साफ़ होते नहीं हैं
और खुद को ज़माने का खुदा बताते हैं लोग
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