सोमवार, 10 जुलाई 2017

राष्ट्र पुकार

रुंधे गले से आ रही ये आज चीत्कार है
मौन जो मौन था अब मौन न स्वीकार है

स्वाभिमानी बन अभी और ये प्रण भी ले
साथ गरजेंगे सभी पास जो हथियार हैं

आज वीरता दिखाने का अवसर आ गया
तू एक के बदले दस गिरा राष्ट्र की पुकार है

हो खड़ा दे वचन तू वापस तब ही आएगा
शत्रु रक्त से धुली जब तेरी हर तलवार है

तेरी सेना जो गरजती है उनसे भी कह ज़रा
जिसको वो धमका रहे वो महज़ कलाकार है

शत्रु मुहाने पर खड़ा तू अब क्या है सोचता
इस रण विजय के लिए राष्ट्र आज तैयार है

तेरा ये जो मौन है वो आज राष्ट्र पर कलंक है
बड़ी सेना है तेरी लेकिन गीदड़ों की सरकार है

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