तन्हा खुद से लड़ना झगड़ना
जैसे लहरों का चढ़ना उतरना
कागज़ की नावों का ठहरना
जैसे भावों का दिल में बहकना
यादों के जैसे तूफान से लड़ना
रोते हुए फिर मोम सा पिघलना
उम्मीद का बिजली सा चमकना
ठंडी हवा सा वो तेरा ख्याल
भीगे हुस्न सी निगाहें लरजना
बचपन के जैसे बारिश के मौसम
मुहब्बत अब भी हुई है न मद्धम
पानी की बूँदों में जिस्म नहाया
ऐसा हसीन मुहब्बत का साया
मेरे चेहरे पर तेरे गेसुओं की छाँव
बारिश के पानी में कागज़ की नाव
चाहे दौलत मिले दुनिया की मुझे
लेकिन बारिश की मुझे जरूरत है
जिसे अब भी ढूंढ़ता फिर रहा हूँ
वो तेरी सावन सी मुहब्बत है
वो तेरी पावन सी मुहब्बत है
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