आज मेरी यहाँ जरूरत क्या रह गयी है। सिर्फ नाम के लिए ही आप लोगों ने मुझे इस परिवार का हिस्सा बना रखा है। क्या कभी आप में से किसी ने मुझसे बात की। मेरे कुछ अच्छा करने पर उत्साह वर्धन किया? अकेला होने पर मेरा साथ दिया?
साथ तो दूर की बात है किसी ने मुझसे ये भी पूछा है क्या कि कैसा हूँ मैं? ठीक हूँ या नहीं?
माफ करना लेकिन परिवार में सभी को महत्त्व दिया जाता है लेकिन यहाँ सिर्फ उनको ही महत्त्व मिलता है जो समाज में ऊँची हैसियत रखते हैं या धनवान हैं।
अगर इसे परिवार कहते हैं तो नहीं चाहिए मुझे ऐसा परिवार जो समाजवाद की अवधारणा से कोसों दूर हो।
अपने हिस्से की ज़िन्दगी मैं अपने ग़मों के साथ गुज़ार लूँगा।
आप लोगों ने क्या किया है?
गरीब समझ कर खाना खिला दिया।
कभी थोड़े बहुत पैसों से मदद कर दी।
और काम न करने पर ताने भी दे दिए।
साथ ही कुछ लोगों ने मेरा मज़ाक भी उड़ाया।
आप में से किसी ने मुझे समझा ही नहीं।
इसीलिए मुझे रिश्तों से नफरत है।
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इतना कह कर कमल आज फिर पैर पटकता हुआ घर से निकल गया। उसके द्वारा धकेले गए किवाड़ अब उसके गुस्से का प्रतिरूप बनकर बजते रह गये। इतने बड़े परिवार में कोई भी उससे बात करने की हालत में नहीं था। अवाक रह गए थे सभी आज उसकी कही बातों से। सच ही था, कमल महत्त्वहीन हो कर रह गया था इस परिवार में।
और कमल रोज की तरह आज फिर देसी शराब के ठेके की तरफ बढ़ चला था जहाँ सारी रात वो शराब को अपना समझ कर जाने कितनी बातें करता। और उसी नशे की बाहों में अपनापन जान कर कहीं भी फूटपाथ पर सो जाता।
यही रह गयी थी अब उसकी ज़िन्दगी और शराब ही था अब उसका परिवार जो उसे खुद से दूर नहीं होने देता था।
- हिमांशु
मंगलवार, 18 जुलाई 2017
परिवार
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