रविवार, 9 जुलाई 2017

किया जो मैंने इश्क़

क्या क्या सोचा
क्या क्या चाहा
थोड़ा सा था जो
आज बेपनाह हो गया
किया जो मैंने इश्क़
गुनाह हो गया

मुझको उसने बड़ा रुलाया
लेकिन मैं ये समझ न पाया
नादानी थी जो इश्क़ किया
इश्क़ को मैंने इश्क़ जिया
इश्क़ में मरना था
इश्क़ में जी गया
किया जो मैंने इश्क़
गुनाह हो गया

जान मेरी अब तो जाए
मुझमें मेरा कुछ बचा न हाये
ज़िन्दगी मेरी पल भर की है
उनको देखूँ तब ये जाये
इश्क़ ने मारा इश्क़ बचाये
जाने कब बेपनाह हो गया
किया जो मैंने इश्क़
गुनाह हो गया

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