सोमवार, 17 जुलाई 2017

भैया जी

राजनीति के खेल में
भैया जी पहुँचे जेल में
कुछ लोग मर गए दंगों में
कुछ जल गए थे रेल में

सैल्यूट ठोक रहे देखो
थानेदार और संतरी भी
भैया जी के चरणों में
लोटे माननीय मंत्री भी
गहरी यारी छन रही है
सत्ता अपराध के मेल में
राजनीति के खेल में
भैया जी पहुँचे जेल में

दानव सी तो देह है इनकी
और वहशी आँखें भी पावन है
गुटखा चबाते मुख से देखो
गालियों का बरसता सावन है
नाम मात्र ही क़त्ल किये लोग
हँसी मजाक पेलमपेल में
राजनीति के खेल में
भैया जी पहुँचे जेल में

बड़ा सुनहरा भविष्य है
इनको मंत्री भी बन जाना है
चुनाव नाम मात्र का होगा
वोट बंदूक पर ही डलवाना है
ईमानदार इतने कहलायेंगे
जितनी पूरी मिलेगी भेल में
राजनीति के खेल में
भैया जी पहुँचे जेल में

ऐसे भैया जी के पीछे
चलती जनता सारी है
इनके आगे ही दिखती
कानून की देवी बेचारी है
संसद भी तो देखो मौन है
फिर थानेदार होता कौन है
सत्ता कोई भी आएगी
भैया जी की कहलाएगी
संसद, विधानसभाओं में भैया जी
चारों ओर ही दिख जायेंगे
जो चाकू बंदूक चला रहे आज
वो कल देश भी चलाएंगे
ऐसे निर्बाध निरंतर करेंगे विजय
भैया जी कहते "लोकतंत्र की जय"
             

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